दशरथ जी के अंगना
कौशिल्या मगन हुई
सभी सुखों के धाम
उसके गोदी में खेलें राम
पुलकित बदन हुई। कौशिल्या ..
राम लिए अवतारी
बनी वो भाग्यवान महतारी
माँओं में रतन हुई। कौशिल्या ..
सुबह से लेकर शाम
वो रटती रहती राम राम
राम की भजन हुई। कौशिल्या ..
करे जग जिसे प्रणाम
छूकर चरण वही श्रीराम
मातु की नमन हुई। कौशिल्या ...
एस० डी० तिवारी
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