जीवों के भेद Poem by ramesh rai

जीवों के भेद

सृष्टि ने रचे जीव अनेक
अनेक जीवों की काया एक
फिर उसमें रमता परम सत्ता
जो उसे चलायमान करती है।

जीव जिन्हें मिला है आवरण
ढकती है हर तंतु को
हर सूक्ष्म काया का नियंत्रण
करता रहता है हर पल।

हर जीव की मस्तिष्क संरचना
भिन्नता का एक प्रतीक बना
मानव क्यूं नही ढूंढता है
हर जीव के सूक्ष्म अणु।

जीवो में अभिलाषा का रंग
किसने भरा इनके प्राणों में।।
Created on 23/9/2025
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@ Ramesh Rai

Wednesday, April 8, 2026
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