तुम मेरी वेदना हो। Poem by ramesh rai

तुम मेरी वेदना हो।

तुम मेरी वेदना हो
तुम मेरी चेतना हो।
तुम्हारा अस्तित्व ही
मेरा अस्तित्व है।।

सृष्टि के आरम्भ से
सृष्टि के अंत तक।
बस कल्पना ही कल्पना है
बाकी सब एक सपना है।।

विधाता ने सृष्टि क्यों रचा
किस वेदना का आसार है।
या फिर किसी वेदना का
निदान का एक प्रयास है।।

Created on 19/9/2025
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@ Ramesh Rai

Wednesday, March 18, 2026
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