Hasmukh Amathalal

Gold Star - 385,581 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

सब का सुख sabka sukh - Poem by Hasmukh Amathalal

सब का सुख हमारा ध्येय है

ना कोई हमारे वचन से दुखी हो
ना कोई हमारे आचरण से खिन्न हो
हम स्वयं मे एक अहिंसा के पुजारी बने रहे
बगिया में फूल हमेशा खिले रहे।

किसी का जीवन मिटाना हमारा काम नहीं
बुरा वर्ताव करना हमारे स्वाभाव में नहीं
हम कामना करे उन जीवों की रक्षा के लिए
जो हरदम मरते है हमारे भोजन के लिए

बुरा वर्ताव करना हमारे स्वाभाव में नहीं
हम कामना करे उन जीवों की रक्षा के लिए
जो हरदम मरते है हमारे भोज के लिए
कई हमलोग विलाप करते है स्वजन के लिए?

रक्षा करे मन से और पार्थी रहे
भगवान सुब को सुखी रखें
जिन धर्म बना इस लिए है
सब का सुख हमारा ध्येय है


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Poem Submitted: Wednesday, April 1, 2015



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