सहेलियां कहती है
मिली है जिंदगी जिनके लिए
हम आहे भरते थे जिनके लिए
आज सुनहरा दिन लग रहा
मेरा जिस्म पूरा अलग से दिख रहा।
कभी नहीं सोचा था
अभी अभी ही आंसू पोछा था
मन उधेड़बुन में था की अब क्या करें?
किसको पूछे और किसको कहें।
विश्वास नहीं हो रहा
ओर बिन बादल बारिश पर भरोसा!
हरगिज़ नहीं कर सकती
फिर भी जीने को कैसे मना कर सकती?
मिल ही गयी है तो इनकार नही
जिऊंगी तो भी सरोकार नहीं
आ जाते है बार बार सामने यहीं
मजबूर कर देते है कुछ कहने यहीं।
कोशिश करुँगी दिल को मनाने को
हाँ भी कर दूंगी आने को
पर ज्यादती मत करना सब के बिच
में नहीं आउंगी समंदर के 'बीच' बिना सोच
कोई नहीं पूछता ये है प्यास कैसी?
दिल क्यों दीखाता है उदासी?
में बार बार लाती हूँ हंसी
सहेलियां कहती है 'तू तो फंसी '
x nitin jagatia Unlike · Reply · 1 · Just now 4 hours ago
x aasha sharma Unlike · Reply · 1 · Just now 4 hours
xemant patel Unlike · Reply · 1 · Just now 6 hours ago
x sohel salim Unlike · Reply · 1 · Just now 5 hours ago
x Anisa Churu Nice जी Good noon ji Unlike · Reply · 1 · 1 hr today
aashish bhardwaj Unlike · Reply · 1 · Just now 4 hours ago
xAasha Sharma Very nice Unlike · Reply · 1 · 58 mins 3 hours ago
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jitu kuaral Unlike · Reply · 1 · Just now 4 hours