जो गंदा है Poem by Sankhajit Bhattacharjee

जो गंदा है

जो गंदा है, वह सबके अंदर गंदा देखता है और सभी को निर्देश देता है।

सिर्फ अपने मन के अंदर गंदगी होती है, पूरी दुनिया साफ़ है, इंसान जानता है।



जो रोता है, वह हल्का हो सकता है, कोमलता की कोई बात यहाँ नहीं हो रही है।

जो रो नहीं सकता, वह अपने अंदर खो जाता है, ताकत की कोई बात यहाँ नहीं हो रही है।

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