छिपकली Poem by Sankhajit Bhattacharjee

छिपकली

एक छिपकली को यह पता है
अगर उसकी पूँछ खो गयी
तो एक नयी पूँछ निकलेगी।
इसलिए वह हमेश बेशर्म रहे गयी।
नितांत स्वार्थ के लिए
कोई बुरा काम करने में
उसको शर्म नहीं आती-
वह कुछ भी काम कर सकती है।
आज अगर उसकी पूँछ खो गयी
तो कल उसकी पूँछ निकल जाएगी
और उसका बुरा काम अच्छा बन जायेगा
और उसे कोई पकड़ नहीं पायेगा।

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