हिंदुस्तान
मुल्क है अपना।
विश्व दरबार में
वह एक सपना।
आसमान में उड़ती
मन की आशा।
लहरों में मचलती
दिल की परिभाषा।
वायु में घूमती
आज़ादी की साँस।
मिट्टी में रहता
बलिदान का एहसास।
मेरे देशवासियों
अपना भाई और बहन की समान।
एक आँख में हिन्दू,
दूसरी में मुसलमान।
प्यार का बंधन
आंधी में भी न टूटा।
हम सब एक हैं,
फर्क झूठा।
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem