हिंदुस्तान मुल्क है अपना Poem by Sankhajit Bhattacharjee

हिंदुस्तान मुल्क है अपना

हिंदुस्तान
मुल्क है अपना।
विश्व दरबार में
वह एक सपना।

आसमान में उड़ती
मन की आशा।
लहरों में मचलती
दिल की परिभाषा।

वायु में घूमती
आज़ादी की साँस।
मिट्टी में रहता
बलिदान का एहसास।

मेरे देशवासियों
अपना भाई और बहन की समान।
एक आँख में हिन्दू,
दूसरी में मुसलमान।

प्यार का बंधन
आंधी में भी न टूटा।
हम सब एक हैं,
फर्क झूठा।

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