काम की तुलना Poem by Sankhajit Bhattacharjee

काम की तुलना

दिमाग का काम है सोचना।
आँख का काम है देखना।
नाक का काम है श्वास लेना।
कान का काम है सुनना।
लब का काम है बोलना।
हाथ का काम है भार उठाना या लिखना।
पैर का काम है आगे बढ़ना।
पेट का काम है खाना को पाचन करना-
खाना पाचन होने से कोई भी काम करने की शक्ति मिलती है।

कोई किसी का काम नहीं कर पाएगा।
कान आगे बढ़ नहीं पाएगा।
पैर देख नहीं पाएगा।
आँख खाना पाचन नहीं कर पाएगी।
जिसके लिए जो काम।
किसी के साथ किसी की तुलना नहीं हो सकती-
अपनी तुलना आप खुद-
जैसे आँख की तुलना सिर्फ आँख
और पेट की तुलना सिर्फ पेट।

प्रत्येक काम महत्वपूर्ण है
और प्रत्येक व्यक्ति भी।
एक काम न होने से शरीर टूट जाता है,
इसलिए कोई व्यक्ति के बारे में कुछ बोलने से पहले दो बार सोचना।

COMMENTS OF THE POEM
READ THIS POEM IN OTHER LANGUAGES
Close
Error Success