परिवार समाज के अंदर है Poem by Sankhajit Bhattacharjee

परिवार समाज के अंदर है

परिवार समाज के अंदर है, लेकिन समाज को हमेशा रखना चाहिए परिवार से बाहर।
परिवार टूट जायेगा अगर समाज घुस गया परिवार के अंदर।

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समाज से बातें करना, लेकिन समाज की बातें ज्यादा सुनना मत।
परिवार की बातें सुनना, लेकिन घर पर ज्यादा बातें करना मत।

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