एक बंदूक से Poem by Sankhajit Bhattacharjee

एक बंदूक से

एक बंदूक से
आप एक आदमी को मार सकते हैं,
लेकिन उनका आदर्श को कभी नहीं।

एक बंदूक से
आप एक इंसान को मार सकते हैं,
लेकिन उनकी इच्छा को कभी नहीं।

एक बंदूक से
आप एक मानव को मार सकते हैं,
लेकिन उनकी मानवता को कभी नहीं।

एक बंदूक से
आप एक व्यक्ति को मार सकते हैं,
लेकिन उनका बयान को कभी नहीं।

एक बंदूक से
आप एक मनुष्य को मार सकते हैं,
लेकिन उनकी मेहनत को कभी नहीं।

एक बंदूक से
आप एक मर्द को मार सकते हैं,
लेकिन उनका मान को कभी नहीं।  

एक बंदूक से
आप एक नर को मार सकते हैं,
लेकिन उनकी नीति को कभी नहीं।

एक बंदूक से
आप एक शख़्स को मार सकते हैं,
लेकिन उनका समय को कभी नहीं।

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