Shayari Page 12 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 12

मांगने से पहले खुद को पूछो, क्या तुम रख पाओगे।
चलने से पहले खुद को पूछो, कितने दूर जा पाओगे।
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मन जिसका नियंत्रण में है, वह राजा से भी अमीर होता।
जो अपना मन को नियंत्रण नहीं कर पाता, वह भिखारी से भी गरीब होता।
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जो तुम्हे आता है, वह सीखो सही।
दूसरे को दूसरा कुछ आयेगा, लेकिन तुम रहना तुम में ही।
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बारिश निकलती है आँसू की तरह।
आसमान हल्का होता है, अंतरात्मा भी, महसूस करो ज़रा।
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दिमाग जिसके हाथ में है, उसको कोई हथियार नहीं चाहिए।
क्योंकि वह सही समय पर दिमाग लगाता, उल्टा-फूल्टा बिना बताये।
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किसके अंदर में क्या है, वह भगवान को भी नहीं पता।
समय पर निकलता है वह, महाकाल बैठ कर सुनता।
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मैं अपना स्थान पर सही।
कौन मुझसे आगे है और कौन पीछे, मुझे पता नहीं।
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कौन कहां पर रहता है, मुझे कैसे पता।
मैं तो अपने में खुश, आज़ादी इसे ही कहा जाता।
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