Shayari Page 13 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 13

आम आदमी प्यार से पढ़ेगा अगर सरल भाषा में लिखा है।
कठिन भाषा केवल जनता को नहीं, बल्कि उनकी सोच को भी घायल करती है।
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छोटी छोटी गलतियां अगर शुरू से रोका नहीं गयी, तो एक दिन बड़ा अन्याय जन्म लेगा।
बच्चों को डांटना प्यार से, ज्यादा डांटोगे तब भी बुरा होगा।
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अपनी मानवता को ढूंढ़ता हुआ इंसान थक गया।
कम से कम अपना दिल को तो पूछो, बिना दिमाग लगाया।
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मैं क्या हूं और क्या नहीं हूं, वह मुझे भी पता नहीं।
मैं सिर्फ मैं हूं, सूरज की तरह सही।
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थोड़ा थोड़ा करके अपना काम कारों रोज़, एक दिन भी न बैठों, सफल होगें।
एक दिन में सब काम करके, पूरा महीना बैठे रहोगे, तो जरूर मरोगे।
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मादा हाथी अपना बच्चा को खो कर पागलपन करती है।
अपना मन भी उसकी तरह निर्बोध है।
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रोज़ रोज़ एक एक ईंट लेकर रखना, एक दिन छूट न जाए।
एक साल के बाद देखना, हमारे मकानों बन गए।
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बिलकुल शांत हो जाओ, गुस्से में न रहो।
शांति लाती है समृद्धि और गुस्सा खा जाता है इंसान की छाँह।
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