आम आदमी प्यार से पढ़ेगा अगर सरल भाषा में लिखा है।
कठिन भाषा केवल जनता को नहीं, बल्कि उनकी सोच को भी घायल करती है।
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छोटी छोटी गलतियां अगर शुरू से रोका नहीं गयी, तो एक दिन बड़ा अन्याय जन्म लेगा।
बच्चों को डांटना प्यार से, ज्यादा डांटोगे तब भी बुरा होगा।
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अपनी मानवता को ढूंढ़ता हुआ इंसान थक गया।
कम से कम अपना दिल को तो पूछो, बिना दिमाग लगाया।
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मैं क्या हूं और क्या नहीं हूं, वह मुझे भी पता नहीं।
मैं सिर्फ मैं हूं, सूरज की तरह सही।
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थोड़ा थोड़ा करके अपना काम कारों रोज़, एक दिन भी न बैठों, सफल होगें।
एक दिन में सब काम करके, पूरा महीना बैठे रहोगे, तो जरूर मरोगे।
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मादा हाथी अपना बच्चा को खो कर पागलपन करती है।
अपना मन भी उसकी तरह निर्बोध है।
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रोज़ रोज़ एक एक ईंट लेकर रखना, एक दिन छूट न जाए।
एक साल के बाद देखना, हमारे मकानों बन गए।
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बिलकुल शांत हो जाओ, गुस्से में न रहो।
शांति लाती है समृद्धि और गुस्सा खा जाता है इंसान की छाँह।
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