Shayari Page 15 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 15

आग को बुझा देता है क्रोध ।
आग जलती है हवा में, लेकिन चिंगारी में जलता है क्रोध।
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अपनी कविताओं किसी को मत पढ़ाओ।
अगर कोई पढ़ना चाहता है, उसे सच ढूंढने के लिए बताओ।
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हर बात का जवाब मत दो।
सिर्फ वक्त का इंतज़ार करो।
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जब बन रहे हो, सुनना पड़ता है।
जब बन गए हो, लोग सुनने आते हैं।
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रिश्ते आसमान का रूप।
आज बारिश, कल धूप।
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बात लहर की तरह-
जनम देती रिश्ते, टूटती भी रिश्ते, सोचो जरा।
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मैदान में जितनी राजनीति होती है, उससे भी ज्यादा होती है घर पर।
घर का बाप ही बनता है नेता, नेता पैदा भी होता है घर पर।
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जो तुम्हें पता है, वह किसी को मत बताओ।
समय पर प्रयोग करो, नहीं तो लोग समझेंगे कि तुम मुर्ख हो।
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