Shayari Page 17 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 17

खुद को पूछो, तुम क्या कर सकते हो।
अगर तुम्हें तैरना नहीं आता तो तेज भागो।
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कीड़ा को जीने दो, उसे मत मारो, वह क्या बिगाड़ा है तुम्हारा।
सोचो अगर कोई बलशाली तुम्हें पीड़ा देते है तो शीशे पर देखना अपना चेहरा।
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अंदर की सोच को बाहर मत आने दो।
बाहर की हवा को बाहर में ही बहने दो।
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पेट अगर सही है तो मन भी सही।
पेट अंदर है तो निरोग; बाहर निकला हुआ है तो रोगी; ख़राब है तो बैठो वहाँ- मानना सही।
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सरलता महान लोगों का परिचय होता है।
मुर्ख इंसान सरल चीजों को कठिन बनाता है।
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परिवार में इतनी सारी बातें होती हैं, जैसे समुद्र में उठती लहर।
मध्य सागर बिलकुल शांत है, वैसे ही रखना अपना अंदर।
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आज आप जिन्दा हैं, कल आप यहां नहीं रहेंगें।
सिर्फ रहेगी आपकी यादें, लोग आपके बारे में कहेंगें।
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इंसान की जिंदगी कैसी होती है- आज वह जीवित है तो कल मृत।
कोई हिसाब नहीं- जो पहले आया, वह जायेगा बाद में; जो बाद में आया, वह सबसे पहले किया समर्पित।
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