Shayari Page 19 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 19

जिसे न पसंद है, मन में छुपा के रखो।
सिर्फ खुद को पसंद करो, अच्छे रहो।
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शरीर को जैसे रखोगे, वैसे ही रहेगा।
अत्याचार करोगे तो जल्दी मरेगा, अच्छा खिलाओगे तो ज्यादा दिन तक जियेगा।
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जो लोग हँस रहे हैं, हमेशा रहो उनके साथ।
जो लोग रो रहे हैं, मत पकड़ो उनके हाथ।
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ज़िंदगी दो दिन की, हंसो और हंसाते रहो।
सिर्फ मूर्ख लोग रोते हैं, खुद को कहो।
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बीमारी धूल की तरह, हवा में घूमती है।
वसूली बारिश की तरह, धूल को भीगा देती है।
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चेहरा देखने से पता लग जाता है अंदर में क्या है।
अंदर की सोच ही चेहरे पर निकल आती है।
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मिटटी की तरह नरम है मनुष्य का मन।
किसी को पता नहीं कब किसके जूतों की छाप लेती है हमारा प्यारा धन।
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भावना आग की तरह इंसान को खा लेती है।
ज्यादा सोचते हुए इंसान पागल हो जाता है।
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