Shayari Page 21 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 21

देव और दानव मानव का हृदय में रहते हैं।
लड़ाई दूसरे के साथ नहीं, लेकिन खुद के साथ है।
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पूजापाठ करने से मन शुद्ध होता है और हृदय शांत।
काम, क्रोध, लोभ, मोह, अहंकार और ईर्ष्या का अन्त।
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मन अगर हाथी की तरह पागल है तो खत्म समृद्धि।
हृदय अगर घोड़े की तरह जंगली है तो विनाश बुद्धि।
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ग्रह नक्षत्र सिर्फ घूमते हैं इधर उधर।
रेखा अपनी मुट्ठी में, नाम अपना काम के आधार पर।
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काम पे लगे रहो प्रेम, भक्ति, एकाग्रता और ईमानदारी के साथ।
बारिश होगी आसमान से, फल के बारे में कभी सोचो मत।
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दार्शनिक खुद नहीं जानता कि वह दार्शनिक है या नहीं।
उसको सिर्फ यह पता है कि उसका पागलपन कोई बीमारी नहीं।
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बचपन की बहुत सारी घटनाएं याद आती हैं।
क्या सही क्या गलत तब पता नहीं था, लेकिन ज़िंदगी के बारे में अब मुझे सब कुछ पता है।
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शब्द दुश्मन से भी खतरनाक होते हैं।
दुश्मन घायल करता है शरीर, लेकिन शब्द आत्मा को रुला देते हैं।
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