Shayari Page 23 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 23

सबसे दुखी है मछली- पानी में अगर वह रोती है तो किसको पता चलेगा।
सबसे सुखी है मेंढक- वह चिल्लाकर सबको बताता है, उसे दर्द लगा।
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कम काम करने से, दिमाग धीमा हो जाता है।
ज्यादा काम करने से, दिमाग में ट्रैफ़िक जाम हो जाता है।
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बातें हवा में उड़ती हैं, लेकिन काम धरती की बुनियाद है।
उसे कहने दो कि मैं मूक हूं, मैं खड़ा रहूंगा भूमि पर और वह डूब जायेगा बालू में।
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दिमाग में क्या चल रहा है, हृदय को भी नहीं पता।
शुद्ध हृदय पढ़ नहीं पाता प्रदूषित मन की मूर्खता।
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मन के अंदर अंधे कुएं का पानी।
बारिश की शुद्धता में मिला हुआ धरती का काला पानी।
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चालाक इंसान मौका का इंतज़ार में रहता है।
सिर्फ बेवकूफ़ इंसान उल्लू की तरह चिल्लाता है।
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कौन क्या बनेगा, किसी को नहीं पता।
तुलना सिर्फ वह करता है, जिसे खुद से लड़ना नहीं आता।
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