Shayari Page 24 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 24

आदमी कैसा है, चेहरा देखकर पता चलता।
बातें सुनने से मालूम पड़ता है मैं किस तालाब का पानी पीता।
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बातें करके, बातें सुनकर, समय बर्बाद मत करो।
केवल अपना काम पे लगे रहो, ज़िंदगी में कुछ करो।
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रोटी आग में फूल जाती है।
ज़िंदगी रोटी की तरह- प्रेरणा उसमें प्राण भरती है।
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सुविधा अगर एक बार मिल गयी, तो ज़िंदगीभर उसे पाने के लिए दौड़ेगा इंसान।
वह एक ऐसी चीज है, जो मेहनती को बनाती है अकर्मण्य और ईमानदार को बेईमान।
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सुविधा मृत्यु से भी भयानक।
एक बार मिल गयी तो समझ लो आपकी प्रतिभा को खा जायेगा कोई घातक।
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आग बुझ जाती है, लेकिन प्यार कभी नहीं।
वायरस भी प्यार की तरह, डेल्टा या ओमिक्रोण, मौजूद सही।
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हमेशा मुख बंद रखो, युद्ध नहीं होगा।
यह सच्चाई फिर से कोविड ने सिखाया।
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