अब कोरोना हवा में उड़ जाएगा।
जो सांस बंद करके रखता है, सिर्फ वह ही बच पाएगा।
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कोरोना कोई रोग नहीं, सिर्फ एक भ्रम।
कलि का पाप को सामने लाया सत्य का धर्म।
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मुर्ख राजा को सलाम करता है, इसलिए पंडित को नहीं पहचान पाता।
पंडित सबको अच्छी तरह जानता है- वह मुर्ख को उपेक्षा करता है और राजा को थोड़ा नाचाता।
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क्षमता राजा के हाथ में, व्यापारी के पास पैसा, बुद्धि पंडित के पास और ग़रीब हवा में।
कवि मुक्ति की सांस लेने की कोशिश करता है हज़ार जुल्मों में।
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प्यार कानून की तरह अंधा होता।
उच्च नीच, अच्छा बुरा, हार जीत, पाप पुण्य, वह नहीं मानता।
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प्यार में नहीं होती विचारधारा।
जहां सभी विचार मिलते हैं, वहां प्यार जन्म लेता, सोचो दोबारा।
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कभी कभी दिल टूट जाता है, लेकिन विश्वास बदलता नहीं।
वह विजयी होता है, जो अपना विचार में सही।
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आपका विचार आपके पास, वह दूसरे का धन नहीं।
दूसरे का विचार दूसरे के पास, उसमें आपका कोई हिस्सा नहीं।
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