किसी की जगह कोई ले नहीं सकता।
इस ज़माने में भी महान होना चाहिए, जैसे पुराने ज़माने में था।
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इंसान मरने के बाद भगवान बन जाता।
जीवित दशा में कोई उसकी प्रतिभा और योग्यता को पहचान नहीं पाता।
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यह मत पूछो क्यों नहीं मिला।
सिर्फ यह देखो क्या मिला।
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जो ज्यादा पूछता है, वह मुर्ख नहीं, वह जानना चाहता है।
मुर्ख तो वह है, जो सब जानने का नाटक करता है।
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जो सब समझ कर बैठा है, वह गिरने बाला है।
जो कभी संतुष्ट नहीं होता, वह विजय की माला पहनता है।
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गुलाब की तरह औरत।
सुगंधित पंखुड़ियों के अंदर छिपे हुए हत्यारा काँटे- ऐसी हक़ीक़त।
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सुंदरता एक भयंकर रूप।
जो जीता, वह राजा; जो आत्मसमर्पण किया, वह बेवकूफ़।
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