Shayari Page 27 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 27

कुछ कुछ लोग हैं, जो किसी का सुख देख नहीं पाते।
वे बीमार हैं अंदर से और बोलतें हैं जानवरों की बातें।
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कुछ कुछ इंसान ऐसे होते हैं, जो किसी की भलाई नहीं चाहती।
वे बुरे हैं अंदर से, इसलिए उन्हें दूसरों की धिक्कार मिलती।
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ज़िंदगी में रुकना मना है।
अगर नहीं रुके तो सोचेगा कैसे।
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मरी ज़िंदगी रुक जाएगी अगर मैं रुक गया।
मुझे चलना है, बाहर से, अंदर से भी, तभी तो समय फैलेगा।
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जब हाथ में कोई काम नहीं होता, दिमाग भी काम करना छोड़ देता।
जब हाथ में काम आ जाता है, दिमाग पकड़ लेता समय का दोस्ताना।
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काम करने वाले को अगर काम नहीं मिलता, तो वह पागल बन जाता।
अगर कोई कामचोर को ज्यादा काम मिल गया, तो वह गुनहगार बनता।
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समय को जो संभाल सकता है, वह ज़िंदगी में आगे बढ़ता।
समय दिल की धड़कन की तरह हमेशा जुड़ा रहता है जीवन के साथ और कभी उसे छोड़ नहीं पाता।
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वह बिलकुल खत्म हो जाता, समय का बंधन से जो निकल नहीं पाता।
समय खुद चलता है, लेकिन दूसरे को कभी चलने नहीं देता।
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