Shayari Page 29 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 29

घर के अंदर क्या चल रहा है, ईश्वर को भी नहीं मालूम।
बाहर आकर जो शांति की वाणी सुनाई, हंसती-खेलती हुई बातें बताई, उसके अंदर काला जुर्म।
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परिवार के अंदर बहुत छिपी हुई बातें रहती, सोचो ज़रा।
लेकिन अपनी भलाई के लिए कभी सामने नहीं लाया जाता, वे घायल करते हैं कांटे की तरह।
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लड़कियां बहुत अच्छी या बहुत बुरी होती हैं, लड़के बीच में रहते हैं।
अगर अच्छी लड़की मिली तो वह भगवान बन जाता और अगर बुरी लड़की मिली तो वह असुर बनता है।
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सभी लड़कियां पैसे की दासी नहीं होती हैं,
लेकिन सभी लड़के रूप के दास होते हैं।
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सभी लड़के बुरा नहीं होता, सभी लड़कियां अच्छी नहीं होती।
अच्छे बुरे मिलाकर दुनिया- आग आविष्कार से शुरू सभ्यता और आग में ही आत्माहुति।
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ऐसे लिखना होता है, वैसे मत लिखना।
आपकी क़लम लिखती है, लेकिन मेरी भावनाएं- हमेशा दिल की बातें सुनना।
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जिस व्यक्ति की भावनाएं नहीं होती है, वह एक गतिशील शब्दकोश होता है।
भाषा की कठिनाई से हिलती है धरती और वह सबको बहुत कुछ बताता रहता है।
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जिस व्यक्ति की भावनाएं होती है, वह खुद से बातें करता है।
वह दूसरों की गलतियाँ न देखकर, खुद को आविष्कार करता है।
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