Shayari Page 3 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 3

पैसा सब कुछ खरीद भी सकता है, खरीद नहीं भी सकता है।
जिनके पास पैसा है, उनकी इनसानियत ही बताएगी कि पैसा क्या कर सकता है।
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जनम से पता नहीं चलता कौन पंडित और कौन मेहतर है।
इंसान का व्यवहार ही बताता है कि वह समाज का किस स्तर पर है।
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अंतिम वक्त सबका आता है, लेकिन समय कभी ख़तम नहीं होता।
जिंदगी दो दिन की, लेकिन अमर विजेता।
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मेरी जिंदगी की फिल्म में भी बॉक्स ऑफ़िस फैक्टर।
मैं ऐक्टर, किस्मत प्रोड्यूसर और समय डायरेक्टर।
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कंक्रीट का जंगल में हम सब जानवरों।
शेर कहाँ मिलेगा, हम सब लोमड़ियों।
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फूलों का रंग छा गया है मन में, लहर की आवाज़ उठी है दिल में।
दिन में सूरज, रात में चंद्रमा, रोशनी जिंदगी में।
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भाषाओं सब एक हैं, भावना में अंतर।
खून सबका लाल है, इनसानियत पत्थर।
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प्यार खुद आता है, उसे बुलाना नहीं पड़ता।
किस्मत में लिखा है समय का पता।
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