Shayari Page 31 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 31

वह चले जाने के बाद बोध आया।
गायक का भी शरीर होता है, गाना उसकी छाया।
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जीवन कभी ख़त्म नहीं होता।
गाना के साथ वह भी जीवित रहता।
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इंसान का दुःख का मज़ा सिर्फ इंसान लेता है।
जानवर बैठकर हिंसा के बारे में सिर्फ सोचता रहता है।
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इंसान का सुख में सिर्फ इंसान ही डरता है।
जो जानवर को बंदी करता है, वह उससे थोड़ा भी नहीं डरता है।
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धर्म कभी अच्छा या बुरा नहीं होता।
इंसान अच्छे या बुरे होते हैं- धर्म हमेशा इंसानों से मुक्त होता।
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अच्छे और बुरे इंसान धर्म को नतीजा देते हैं।
यह धर्म का दोष नहीं- ग़लती सिर्फ इंसान की होती है।
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जन्म से बड़ा है कर्म, कर्म से बड़ा व्यवहार।
जन्म कुत्ते बिल्लियाँ के भी होते हैं, कर्म सिर्फ इंसान का, और विद्वान का शिष्टाचार।
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सबको मान देकर अपनी मत बताना।
किसी को छोटा करने से खुद को ही छोटा किया जाता।
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