Shayari Page 32 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 32

धर्म कभी अच्छा या बुरा नहीं होता।
अच्छा या बुरा तो इंसान होता और धर्म को हमेशा दोषी कहा जाता।
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लोकतंत्र सबसे बड़ा ईश्वर है, सबसे बड़ा धर्म भी।
लोगों को लोकतंत्र मानना चाहिए, नहीं तो पूजा करने से कुछ मिलेगा नहीं।
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खुद को देखो- दूसरे को जितना देखोगे, उतना परेशान हो जाओगे।
खुद को लेकर खुश रहो- तैरते समय मत डुबो पानी में।
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अपने में आप, अपने में सब कुछ।
अपने में समृद्धि, भ्रम है दूसरा कुछ।
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मेरे पास जब कुछ नहीं था, तब वह मेरे पास आई थी।
अब मेरे पास सब कुछ है, मैं उसे क्यों छोड़कर जाऊँ अभी।
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वह मुझे छोड़कर चली गई थी, जब कुछ नहीं था मेरे पास।
अब मेरे पास सब कुछ है, वह अब लौट कर आना चाहती है, मैं क्यों उसे आने के लिए बोलूं अपने पास।
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ज़िंदगी में कौन जीतता और कौन हारता, इससे मुझे कोई मतलब नहीं।
जो पूरे रास्ते चल सकता, वह मर्द सही।
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जीतने से या हारने से कुछ विचार नहीं होता।
जो समय के साथ पूरा रास्ता चल पाया, वह ही विजेता।
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