Shayari Page 33 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 33

माँ हथनी का बच्चा जब खो जाता है, उसकी जो हालत होती है,
समय का काम जब समय पर नहीं होता तो मन की स्थिति वैसी होती है।
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माँ हथनी का बच्चा जब खो जाता है, उसकी जो हालत होती है,
जब किनारे पर आकर नाव डूब जाती है तो दिल की स्थिति वैसी होती है।
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जो ज्यादा लिखता है, वह ज्यादा बोल नहीं सकता।
जो ज्यादा बोलता है, वह अपना नाम के अलावा कुछ लिख नहीं सकता।
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अगर लिखना है तो सिर्फ अपना नाम लिखो।
दूसरे का नाम लिखकर अपना समय बर्बाद मत करो।
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गलतियां होगीं अगर आप करेंगें काम।
जो गलतियां नहीं करता, वह चलना शुरू नहीं किया, वह नाकाम।
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मिथ्या से भी भयंकर अप्रिय सत्य।
मिथ्या की सज़ा जेल, लेकिन अप्रिय सत्य की सज़ा फांसी, यह चरम सत्य।
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सिर्फ बेवकूफ लोग ही अहंकारी होते हैं।
सबको अगर नीचे रखना है तो खुद को ही नीचे जाना पड़ता है।
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