समाज कैसा है, कोई अकेला रह नहीं पाता।
लेकिन दूसरे के साथ रहो तो झगड़ा होता।
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अकेले रहो, मज़ा नहीं आएगा।
दूसरे के साथ रहो, ज्यादा मज़ा नहीं आएगा।
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एक दूसरे की बात सुननी चाहिए परिवार में।
अगर खुद की बात सुनोगे तो अकेले जीना पड़ेगा, अलग सबसे।
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सोच समझकर बात कहनी चाहिए अगर परिवार को रखना है।
बात एक ऐसी चीज़ है, जो सौ साल पुराने रिश्ते को एक पल में तोड़ देती है।
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ललाट में क्या लिखा है, वह वक्त ही बताएगा।
जो समय के साथ साथ अपना ललाट की लिपि को बदल देता है, वही विजेता।
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ललाट कर्म से डरता है, जैसे हिरण डरता है शेर से।
कर्म समय को भी बदल देता है, कवि को पता चला महाकाल से।
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जो खोता है, वह नहीं रोता।
वही रोता है, जो कभी नहीं खोता।
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खोनेवाला जानता है और कुछ नहीं बचा है खोने के लिए।
जो कभी नहीं खोया, उसे डर है खोने का, इसलिए।
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