Shayari Page 40 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 40

पत्नी इसलिए तलाक नहीं देती, पति जाकर दूसरी शादी कर लेगा।
उसकी तरह और एक जिंदगी फंस जाएगी, और एक जीवन बर्बाद होगा।
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अपने बच्चों को छोड़ दो, बांधकर रखो पीछे से।
उनकी सोच को उड़ने दो और उनके पागलपन को छुपाओ उनसे।
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कम सोचने से कुछ नहीं होता।
लेकिन ज्यादा सोचने से दिमाग ख़राब हो जाता।
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दूसरे के बारे में सोचो मत, अपने बारे में भी नहीं, देश के बारे में भी नहीं, भगवान के बारे में भी नहीं।
सोचो सिर्फ- दुनिया में कुछ बुरा नहीं और कुछ भी नहीं सही।
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जो सोचता है, सिर्फ वह ज़िंदगी लिख सकता है; जो पढ़ता है, वह कभी नहीं।
दिमाग पढ़ता है (हिसाब) , दिल सोचता है (अनुभूति) , बनो इंसान सही।
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ज्यादा पढ़ने से सोच मर जाती है।
सिर्फ एक शब्द सीखो, आज़ादी, और सोचो ज़िंदगी भर- वह क्या है।
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जो इंसान सिर्फ खुद के लिए जीता है, वह कभी नहीं डरता।
जिसके कंधों पर अपने परिवार का बोझ है, सिर्फ वह हमेशा डरा हुआ रहता।
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जो इंसान सिर्फ खुद के लिए जीता है, वह चालाक होता है।
और जो दूसरे के लिए जीता है, वह या तो मूर्ख या दार्शनिक होता है।
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