Shayari Page 41 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 41

मच्छरों का जीवन कैसा होता।
वे आज जन्म लिए, कल काटना सीखेंगें, परसों काटने का समय मर जाएंगे- लेकिन खून सिर्फ मेरा बहता।
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जो इंसान वंचित होता है, वह मच्छर की तरह व्यवहार करता है।
जो समाज उसे वंचित करता है, वह उसे ही काटने आता है और खुद को मारता है।
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जान लो, जब तुम्हारी साधारण बातें लोगों के मुंह के बोल बन जाती हैं, तुम प्रसिद्ध हो गए हो।
जब तक तुम्हारी बातों पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है, तब तक तुम एक भिक्षुक हो।
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जो ज्यादा बातें करता है, वह कभी लोगों का दिल नहीं जीत सकता।
जो ज्यादा काम करता है, सिर्फ वह लोगों का दिल जीतता।
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कभी कभी दो या तीन दिनों के लिए लिखना बंद करना पड़ता।
सोचना बंद हो गया है, ऐसा नहीं कि लिख नहीं सकता।
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सोच सूरज की तरह उज्ज्वल।
कभी कभी उसे छिपा देता बादल।
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डरने की कोई बात नहीं, लिखते रहना।
समय पर सभी सत्य प्रकाशित हो जाते हैं, अपने आप पर विश्वास रखना।
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