Shayari Page 42 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 42

अगर किसी को पसंद नहीं है तो सामने कुछ बोलना मत।
अपना काम पर हमेशा रखना अपना मन और मन में ही रखना मन की बात।
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अगर किसी को पसंद नहीं है तो उसके साथ कभी मुंह मत लगाना।
वक्त का इंतजार में रहना और वक्त पर ही सिर्फ अपना काम करके बताना।
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जीवन ख़त्म हो जाता है, लेकिन लेखन कभी ख़त्म नहीं होता।
दिल सिर्फ एक सत्य को पहचानता है, लेकिन मन असत्य के तट पर हमेशा घूमता फिरता रहता।
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कलम दिल की आवाज़ सुनती है- हमेशा सत्य के साथ रहना।
मन के काले बादल को एहसास की बारिश बनाकर धरती पर गिराना।
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मेरा लेखन दुनिया के दिमाग पर राज करेगा।
मैं एक विजेता, मैं इतिहास लिखूंगा।
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मेरा लेखन शक्तिशाली है राजा से भी।
राजा मरने के साथ ही राजपाट ख़त्म हो जाता, लेकिन कविता कभी मरती नहीं।
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कभी कभी मैं दोस्ती और प्यार के बीच जो अंतर है, उसको देख नहीं पाता।
दोस्ती के साथ विश्वास मिला है या नहीं, वह समझना इतना आसान नहीं होता।
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एक संबंध के भीतर गहराई कितनी है, वह भगवान को भी नहीं मालूम।
अगर संबंध बनाकर देखना है तो अच्छा तैरनेवाला भी डूब जायेगा- रो रहा है एक मासूम।
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