Shayari Page 44 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 44

अंदर की सोच को बाहर मत आने दो, सिर्फ अपना काम करके दिखाओ।
पसंद और न पसंद अपने में रखो, किसी को मत बताओ।
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आपके अंदर में जो है, अगर वह बाहर आ जाये तो लोगों को मज़ा आएगा।
अपनी ज़िंदगी सिर्फ अपनी संपत्ति होती है, लोगों के जूते कौन खाएगा।
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किसी की बातों पर ज्यादा ध्यान मत दें।
बातें हवा की तरह उड़ती रहती हैं।
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बातें उड़ जाएगी हवा की तरह, जाएगी जहाँ कोई इंसान नहीं जा सकता।
पड़े रहेगी सिर्फ सोच, सिर्फ अपनी सोच पर ध्यान दें, कोई आपकी जगह नहीं ले सकता।
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दूसरों की बातें सुनकर न ख़राब करें अपना दिमाग।
बातें हवा की तरह, दूसरे लोग हवा की धूल और मैं खुद मेरे दिल का दिमाग।
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अगर आप विजयी हैं, दूसरे लोग आपको सुनायेंगें, कारण वे आपकी तरह सुखी नहीं हैं।
आप सब कुछ सुनकर शांत रहिये, अगर नाराज़ हो गए तो दूसरे लोग आपकी कमजोरी समझ लेंगें, आपकी ख़ुशी पानी में।
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मैं सही हूँ या गलत, वह मुझे वक्त बताएगा, आप नहीं।
आप बोल रहें मतलब जलन, वक्त पर आपको जवाब दूँगा सही।
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मैं चलता हूँ मेरे रास्ते से, आप आपके रास्ते से।
बीच में जो अंतर है, वह मेरी और आपकी सोच में।
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