Shayari Page 45 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 45

पैर चाटते समय उसकी जीभ अलग हो गयी।
उसके मालिक के दोनों जूते को उसने अपनी ज़बान पर रखा सही।
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पैर चाटते समय उसका दिमाग अलग हो गया दिल से।
उसके मालिक के सामने वह खुद को संभाला बड़ी मुश्किल से।
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जानवर सिर्फ जानवरों की तरह व्यवहार कर सकते हैं।
एक इंसान के रूप बहुत सारे हो सकते हैं।
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एक इंसान के दिल में चूहा, बिल्ली, कुत्ता और बाघ रहते हैं एक साथ।
इंसानियत रहती है बेहोश मन के अंदर और करती है जानवरों की तरह बात।
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किसी को बताओ मत, सिर्फ लिखकर जाओ अपनी नीति।
अगर बताओगे तो ज़रूर मरोगे, लेकिन तुम्हारी सोच हजारों दीपक जला सकती।
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जो ज्यादा बोलता है, वह बेवकूफ है; बुद्धिमान व्यक्ति बिलकुल बहस नहीं करता।
काम करके दिखाना कि तुम सही हो, ज्यादा बोलनेवाला खो जायेगा, और तुम विजेता।
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जो मुझे विश्वास करता है, मेरी शुभकामनाएं सिर्फ उसके लिए हैं।
जो मुझे मारना चाहता है, मेरी शुभकामनाएं उसके पूरे परिवार के लिए हैं।
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मैं किसी से डरता नहीं हूं, लेकिन लोगों को मैं ज्यादा प्यार कर लेता हूं।
मुझे कमज़ोर मत समझना, मैं अंदर से बहुत मजबूत हूं।
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