समाज की आदत है ज्ञान प्रदान करना हर एक व्यक्ति को।
समाज में रहो, अगर जीना है समाज की बाते कभी मत सुनो।
===
समाज एक अंधा कुआँ है- उसका पानी से सिर्फ नहाना, कभी पीना मत।
पीना सिर्फ बारिश का पानी, जो लाता है आसमान की खबर, और जीना खुद के साथ।
===
मैं आज़ाद हूँ, इसलिए नहीं, मैं कुछ भी कर सकता हूँ।
इसलिए, मैं आप की आज़ादी नहीं छीन लेता हूँ।
===
आज़ादी का मतलब सिर्फ आबाद में नहीं जीना।
आज़ादी का मतलब सही समय पर आवाज़ उठाना।
===
जो मैं बिल्कुल सोचता नहीं हूं, वह कभी होता नहीं।
जो मैं सोचता हूं, वह भी कभी होता नहीं।
===
मुझे बिल्कुल पता नही: क्या होगा, क्यों होगा, कैसे होगा और कब होगा।
मुझे सिर्फ यह पता है कि कुछ तो होगा।
===
आप एक चोर हैं, सैनिक को बोलते हैं, 'युद्ध करो, युद्ध करो'।
लेकिन अपने बेटे को बोलते हैं, 'विदेश जाकर अमीर बनो और शांति से वहां बैठे रहो'।
===
This poem has not been translated into any other language yet.
I would like to translate this poem