Shayari Page 46 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 46

समाज की आदत है ज्ञान प्रदान करना हर एक व्यक्ति को।
समाज में रहो, अगर जीना है समाज की बाते कभी मत सुनो।
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समाज एक अंधा कुआँ है- उसका पानी से सिर्फ नहाना, कभी पीना मत।
पीना सिर्फ बारिश का पानी, जो लाता है आसमान की खबर, और जीना खुद के साथ।
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मैं आज़ाद हूँ, इसलिए नहीं, मैं कुछ भी कर सकता हूँ।
इसलिए, मैं आप की आज़ादी नहीं छीन लेता हूँ।
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आज़ादी का मतलब सिर्फ आबाद में नहीं जीना।
आज़ादी का मतलब सही समय पर आवाज़ उठाना।
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जो मैं बिल्कुल सोचता नहीं हूं, वह कभी होता नहीं।
जो मैं सोचता हूं, वह भी कभी होता नहीं।
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मुझे बिल्कुल पता नही: क्या होगा, क्यों होगा, कैसे होगा और कब होगा।
मुझे सिर्फ यह पता है कि कुछ तो होगा।
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आप एक चोर हैं, सैनिक को बोलते हैं, 'युद्ध करो, युद्ध करो'।
लेकिन अपने बेटे को बोलते हैं, 'विदेश जाकर अमीर बनो और शांति से वहां बैठे रहो'।
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