Shayari Page 7 Poem by Sankhajit Bhattacharjee

Shayari Page 7

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भूख जिसे चोरी करना सिखाया, वह बेकसूर है।
असली चोर तो वह है, जो ज्यादा खा के भी लालच करता है।
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कुत्ते के साथ मुँह मत लगाना।
गंदे का मुँह मत देखना।
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घने बादल हमेशा बारिश नहीं लाता।
कभी कभी खुशी में भी ग़म नहीं जाता।
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अगर औरत के साथ प्यार हो, तो वह रोमांस है।
लेकिन कोई मर्द के साथ प्यार होना ओफ्फेंस है।
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सारी दोस्ती कभी प्यार नहीं बनती ।
सभी रिश्तों नहीं ला पाते रिश्तेदारों को भी।
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पागलख़ाने में पागल नहीं रहते।
पागलपन सबके दिमाग में, मानसिक इसे ही कहते।
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पूजा जितनी भी करो, मंत्र हज़ार बार पढ़ो, भगवान खुश नहीं।
लोकतंत्र के पुजारी ही असली पुजारी, सच यही।
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चादर में सोए रहो या बिस्तर पर, नींद होनी चाहिए।
दिल से प्यार करो या दिमाग से, आस्था होनी चाहिए।
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COMMENTS OF THE POEM

I understand that Shankhjitji comes from a non-Hindi speaking area. But instead of ‘ ओफ्फेंस' he should have used "gairkaannooni", I think

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All said and done the slight ‘against same- love' is chauvinism, we should avoid. The sexual minorities (LGBTQA) also deserves respect. And one should avoid ‘HINGLISH'.

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" भूख जिसे चोरी करना सिखाया, वह बेकसूर है। असली चोर तो वह है, जो ज्यादा खा के भी लालच करता है। " true. The glutton who eats more food than he needs and the ‘khamandi' who buys more food than he uses, and wastes the unused food are ‘Kasuur' i

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