बाप का प्यार जिसे नहीं मिला, वह कंधे झुका होता।
माँ का प्यार जिसे नहीं मिला, वह क्रिमिनल बनता।
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हर तरफ बालू ही बालू, कहां पर मिलेगा समुंदर?
कहां पर मिलेगी शांति, दुःख की आग में खोया है अंदर!
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कभी कभी इंसान की बातचीत सुनाई देती है।
एकदम इंसान जैसा, लेकिन इंसानियत छिपी हुई है।
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कहाँ से आया हूँ, पता नहीं; कहाँ जाऊँगा, वह भी पता नहीं।
सिर्फ ये पता है कि मैं जिंदगी जी रहा हूँ यहीं।
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चुपचाप बैठे रहना भी एक काम होता है।
हर बात पे कुत्तों की तरह भूँकना केवल बेवकूफी है।
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गर्मी में पसीना दिखाई देता है, सर्दी में कभी नहीं।
बेवकूफ़ दिखाकर काम करते है, लेकिन बुद्धिमान समझते है चुपचाप रहना ही सही।
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जो ज्यादा बात करता है, वह ऊपर से चालाक है।
जो कम बात करता है, वह अंदर से मज़बूत होता है।
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बड़ा आदमी बड़ी चीज़ को छोटा करके दिखाता है।
छोटा आदमी छोटी चीज़ को बड़ा करके बताता है।
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