Tumhare Geet (Hindi) तुम्हारे गीत Poem by S.D. TIWARI

Tumhare Geet (Hindi) तुम्हारे गीत

तुम्हारे गीत

शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।
जी भर के फुहारों में, हमने नहा लिया।

घुंघरू से बजते हैं गीतों में वो ढलकर।
घुल जाते हैं कानों में, मिश्री से सुनकर।
रोते अकेले में, दिलों को चहचहा दिया।
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।

शब्दों को तेरे जादू कहूं या कि गुलदस्ता।
गीतों का चमन सारा, उन्हीं से है महकता।
खोल शीशी इत्र की, नगमों की हवा दिया।
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।

नगमों का तेरे दिल ये, कबसे है मतवाला।
बना दिया गीतों के उपवन को मधुशाला।
दिल हो गया नशे में ज्यूँ मदिरा बहा दिया।
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।

गीतों को दुखी करके, तुम चले किस सफर पे।
बहुत रो रहे वो किन्हीं आवाजों में घुल के।
तारों के साथ तुमने, हवाओं को रुला दिया।
शब्दों को बना तुमने, पानी बहा दिया।


- एस. डी. तिवारी

Sunday, August 5, 2018
Topic(s) of this poem: hindi,memory
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