तुम्हें पता है,
नज़रों की शरारत
कोई खेल नहीं होती—
ये तो
...
मेरे दोस्तों,
दुश्मन को मारने के लिए
हथियार नहीं चाहिए—
कभी-कभी
...
मैं आज
किसी उत्सव का गीत नहीं लिखता—
मैं आज
स्मृतियों के सामने
...
मुझे मत रोको उस पवित्र मिलन से
जहाँ दो मन सच के साथ बँधते हैं—
वहाँ प्रेम कोई सौदा नहीं होता,
वहाँ दिल ईमानदारी से धड़कते हैं।
...
मैं तुम्हें चाहता हूँ—
इस तरह जैसे प्यास
पहली बारिश की खुशबू चाहती है।
...
आओ…
मेरी देहरी पर कदम रखो धीरे से,
जैसे सावन की पहली बूंद
मिट्टी को छू ले—
...
प्रिये—
तुमसे मिलने से पहले
मैं जी तो रहा था,
पर जैसे…
...
आओ…
और इस दुनिया की थकान
अपने कंधों से उतार दो—
जैसे कोई रात
...
प्रिये—
अगर हमारे पास
अनंत समय होता,
तो मैं तुम्हें
...