Ritesh Tiwari

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Best Poem of Ritesh Tiwari

My Dream

आज बहुतों की जुबां पे मेरा ज़िक्र हुआ,
हमारे भविष्य के बारे में उन्हें फ़िक्र हुआ,

कुछ कहते है कि मैं रस्ते से भटक गया हूं,
हक़ीक़त और सपनो के बीच अटक गया हूं,

कुछ कहते है कि तेरी बातें सुनने में अच्छे लगते है,
लेकिन ऐसी बाते और सपनो से घर नहीं चलते है,

सपनो के बारे में उनका अजीब सा शक़ है,
जैसे कि बड़े सपनो पे किसी और का हक़ है,

क्या सोच और सपने, इंसान देख कर आते है,
कौन समझाए उन्हें जो अपने सपनो पर,
अपने ही पैर रख कर जाते है।

कुछ कहते है कि तुम्हारे जैसे मेर भी सपने थे,
बड़ी - बड़ी बातें हमारे दिल में भी पनपे थे,
लेकिन मेरे सपने ...

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