Atul Rajput

Rookie - 10 Points (10-09-1990 / Sahanpur)

Chahta Hu Tujjko Tuut Kar..... - Poem by Atul Rajput

चाहता हूँ तुझको टूटकर बेपनाह मैं चाहता हूँ............
पर चाहती है तू क्या, ये समझ ना पाता हूँ, , , , ,
आँसू भी थक चुके है गिर गिर कर अब मेरे...............
चाहता हूँ खुलकर रोना, पर रो भी तो ना पाता हूँ, , , , ,
बाते मेरे दिल की लगती उसको नुमाइशे,
हालात उसको अपने समझा भी ना पाता हूँ.............
सोचता हूँ कभी कभी क्यों प्यार करू उसको...
इस दिल की जिद के आगे बस झुक सा जाता हूँ......
हंसती है जब भी वो लगता है जिंदगी है....
उसके ख़यालो से ही बस खुश हो जाता हूँ...............
ना है कोई तम्मना ना कोई आरजू है, , , ,
यादो को क्यों उसकी फिर सीने से लगाता हूँ...........
ना होता उसका अरमां तो मर चुका होता होता, , ,
उसकी ही जुस्तजू में क्यों जीए जाता हूँ..................


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Poem Submitted: Friday, July 5, 2013

Poem Edited: Thursday, July 18, 2013


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