Anil Kr Sinha

Anil Kr Sinha Poems

जलने लगेगी कुछ ही पलो में
चिता पर रखी लाश
साथ ही
जलना होगा उस जूँ को भी
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कुदरत काओ कहर मैने देखा था
जीने के लिए लेते जहर मैने देखा था
दुनिया में रोज लाखों जीते मरते होंगे,
पर मौत की ओ बहती लहर मैंने दंखा था
...

The Best Poem Of Anil Kr Sinha

नियति

जलने लगेगी कुछ ही पलो में
चिता पर रखी लाश
साथ ही
जलना होगा उस जूँ को भी
जो रहती आइ है उसके सर के बालों में
क्यों होगा यह क्रूर मजक उसके साथ
क्या जिन्दा रहकर उसने कोइ अपराध किया है
आदमी मरा है जूँ तो नही
क्यों जलेगी वो?

शायद बन्धी है जूँ शोषण के माया जाल में
इसीलिए वह भाग नही पाती
किसी ने रोका नही है उसे
जब तक जिन्दा था वह आदमी
जूँ ने खुब शोषण किया था उसका
दिन-रात
और आज भी शोषणरत है
जब वह मर चुका है
स्वार्थ में डूबा हर व्यक्ति
इसी अंजाम को प्राप्त करता है कि
वह किसी को खाता है तो कोइ
उसको खा जाता है
हर शोषण कर्ता की यही नियती है

अनिल कुमर सिन्हा "गुड्डू"

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