कुदरत काओ कहर मैने देखा था
जीने के लिए लेते जहर मैने देखा था
दुनिया में रोज लाखों जीते मरते होंगे,
पर मौत की ओ बहती लहर मैंने दंखा था
र्दद का वयार, नाउम्मीद का आलम
आब-ए-तल्ख पीते मैने देखा था
दुनिया में रोज लाखों जीते मरते होंगे,
पर मौत की ओ बहती लहर मैंने दंखा था
गुम खुश्क खस्ताि जन्दगी से काइल
अपनेअपनो को गैर होते मैने देखा था
दुनिया में रोज लाखों जीते मरते होंगे,
पर मौत की ओ बहती लहर मैंने दंखा था
आहिस्ता-आहिस्ता रुकती सरकती सांसें
आकिबत मौत का नजारा मैने देखा था
दुनिया में रोज लाखों जीते मरते होंगे,
पर मौत की ओ बहती लहर मैंने दंखा था
देखकर आलम खुदा दिल भर आया
मौत का वक्त मांगते मौने देखा था
दुनिया में रोज लाखों जीते मरते होंगे,
पर मौत की ओ बहती लहर मैंने दंखा था
अनिल कुमार सिन्हा (गुड्डू)
कोयला भवन,
बी0सी0सी0एल0
मो0न0-9470595211
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