ऐ देश को नोंच नोंच कर खाने वालों,
ऐ हिन्दुस्तान को छोटी- छोटी जाती के,
टुकड़ों में बांटने वालों,
होश में आओ,
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तिरंगे तू गवाह है,
तेरे ही सामने, संविधान ने
जाती, धर्म, वर्ण- रहित सामाज कि व्यवस्था दी थी,
लेकिन, आज नागरिकों से सबसे पहला सवाल होता है -
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तिरंगे हम तेरे सामने सिर झुकाते हैं,
लेकिन, आज हमारा सिर, शर्म से झुक रहा है,
हमें धिक्कार है,
पिछले पांच वर्ष महिला राष्ट्रपति रही
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तुम जो होंसला दिखाओ तो फर्क पड़ता है साहेब.
वर्ना, नंबर दो क्या, नंबर एक भी हो जाओ, किसे फर्क पड़ता है?
जलसे, जयकारे, चापलूसों की फ़ौज, किसे फर्क पड़ता है?
देशभक्त को अपना दोस्त बनाओ तो फर्क पड़ता है,
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पधारो म्हारा देश, पड़ोसी के लिये पलक पावणे बिछा देंगे
तुम जवानों के सिर काट लो, हम चुप नहीं बैठेंगे, कहकर सो जायेंगे
आतंक का नंगा नाच दिखाओ, भेदिये जुटा देंगे
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अब तो शमशान में भी आरक्षण हो जाना चहिये,
sc st obc gujar सभी को मरने पर आरक्षण
दिया जाना चाहिए, अगर आरक्षित वर्ग के लोग कम
हों तो स्वस्थ्य लोगों को जबरदस्ती मरने की व्यवस्था
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एक गधे को, जींस की पेंट, लिनेन की शर्ट,
रीबोक के जूते, पहनाये जा रहे हैं
प्रोफेसनल डिग्री, अपोइन्टमेंट लेटर,
मारुती कार थमाई जा रही है
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मै मरीज की जेब तलाश करता हूँ,
जेब में कुछ मिल जाये तो,
बीमारी तलाश करता हूँ,
अगर जेब खाली है तो -
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ऐ देश को नोंच नोंच कर खाने वालों
ऐ देश को नोंच नोंच कर खाने वालों,
ऐ हिन्दुस्तान को छोटी- छोटी जाती के,
टुकड़ों में बांटने वालों,
होश में आओ,
आरक्षण का गन्दा खेल बंद करो |
शर्म आती है तुम्हारी राजनीतिक व्यवस्था पर,
६० साल बाद भी, तुम इन्हें मुख्या धारा से नहीं जोड़ पाये |
अगर इनकी इतनी ही फिक्र है तो इन्हें सुविधाएँ दो,
रोटी, कपडा, माकन, मुहय्या कराओ.
इनका जीवन स्तर सुधारो,
कम बुद्धी वालों को, बुद्धीमानों के साथ या उनसे ऊपर मत बैठाओ |
इनको डाक्टर, इंजीनियर की डिग्री देकर देश का बेडा गर्क मत करो |
तुम इंसान को इंसान ही रहने दो,
मत किसी को हिन्दू, मुसलमान, एस सी / एस टी/ ओबीसी /गूजर बनाओ |
देश के होनहारों, बुद्धीमानों की परीक्षा मत लो |
इनकी अहिंसा को, कमजोरी मानने की भूल मत कर बैठना,
इनमे सुकरात-सा निष्चय और भगत सिंह जैसा होंसला है,
अगर प्यार की भाषा समझ नहीं आयी तो,
होशियार!
लादेन बनना मजबूरी नहीं,
इनकी जरुरत होगी