Dr Dilip Mittal Poems

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ऐ देश को नोंच नोंच कर खाने वालों,
ऐ हिन्दुस्तान को छोटी- छोटी जाती के,
टुकड़ों में बांटने वालों,
होश में आओ,
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3.
तिरंगे तू गवाह है,

तिरंगे तू गवाह है,
तेरे ही सामने, संविधान ने
जाती, धर्म, वर्ण- रहित सामाज कि व्यवस्था दी थी,
लेकिन, आज नागरिकों से सबसे पहला सवाल होता है -
...

तिरंगे हम तेरे सामने सिर झुकाते हैं,
लेकिन, आज हमारा सिर, शर्म से झुक रहा है,
हमें धिक्कार है,
पिछले पांच वर्ष महिला राष्ट्रपति रही
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5.
तुम जो होंसला दिखाओ

तुम जो होंसला दिखाओ तो फर्क पड़ता है साहेब.
वर्ना, नंबर दो क्या, नंबर एक भी हो जाओ, किसे फर्क पड़ता है?
जलसे, जयकारे, चापलूसों की फ़ौज, किसे फर्क पड़ता है?
देशभक्त को अपना दोस्त बनाओ तो फर्क पड़ता है,
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6.
पधारो म्हारा देश

पधारो म्हारा देश, पड़ोसी के लिये पलक पावणे बिछा देंगे
तुम जवानों के सिर काट लो, हम चुप नहीं बैठेंगे, कहकर सो जायेंगे

आतंक का नंगा नाच दिखाओ, भेदिये जुटा देंगे
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7.
शमशान में भी आरक्षण

अब तो शमशान में भी आरक्षण हो जाना चहिये,
sc st obc gujar सभी को मरने पर आरक्षण
दिया जाना चाहिए, अगर आरक्षित वर्ग के लोग कम
हों तो स्वस्थ्य लोगों को जबरदस्ती मरने की व्यवस्था
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8.
एक गधे को

एक गधे को, जींस की पेंट, लिनेन की शर्ट,
रीबोक के जूते, पहनाये जा रहे हैं
प्रोफेसनल डिग्री, अपोइन्टमेंट लेटर,
मारुती कार थमाई जा रही है
...

9.
मरीज की जेब

मै मरीज की जेब तलाश करता हूँ,
जेब में कुछ मिल जाये तो,
बीमारी तलाश करता हूँ,
अगर जेब खाली है तो -
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