Kanupriya Gupta

Rookie (17 may 1985)

Kanupriya Gupta Poems

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Best Poem of Kanupriya Gupta

Shaheed Ki Yaad: Tum Lout Aao

जहाँ भी गए हो चले आओ अब
की वो उम्मीद जो जाते समय
मेरे आँचल में रखकर चले गए थे
वो तुम्हारे इंतज़ार में मुरझाने लगी है

वो मुस्कराहट जो तुम जाते जाते
मेरे होंठों की खूंटी पर टांग गए थे
उसे ना जाने कहा से आकर
अकुलाहट ने जकड लिया है


तुम्हारी सफल यात्रा के लिए
भगवान को चढ़ाया प्रसाद
फीका सा लगने लगा है
शायद भोग लगा लिया उसने भी

लौट आओ की तुम जो दरवाज़े पर
पुनर्मिलन की आस छोड़ गए हो
वो भी तुम्हारे पिताजी की तरह
इधर से उधर चक्कर लगा रही है

अपनी माँ की आँखों में जो
पुत्रमोह छोड़ गए हो तुम
वो कई दिनों की अधूरी नींद के ...

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