Saturday, October 3, 2015

बेईमानों का राज है भैया Comments

Rating: 4.0

बेईमानों का राज है भैया, बेईमानों का राज
समझ लो तुम ये आज, समझ लो तुम ये आज

नई नई योजनाये बनती करने नए घोटाले
...
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Shiv Chandra
COMMENTS
Rajnish Manga 04 October 2015

देश की राजनैतिक एवम् सामाजिक व्यवस्था पर अच्छा व्यंग्य है जो पाठकों को सोचने पर मजबूर कर देता है. कविता से ही कुछ विचारणीय उद्धरण: गरीबो का नाम दिखाकर अपनी झोली में ये डाले / गाँव का सबसे अमीर है होता बीपीएल कार्डधारी / अपराधिक मामले है जिनपर लड़ते वही चुनाव / पिसती है बस आम जनता ऐसे या वैसे

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Kumarmani Mahakul 03 October 2015

Wonderful and very thought provoking poem shared.....

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Vishal Sharma 03 October 2015

Nice poetry man Go on keep penning

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