Saturday, November 14, 2015

शादाब शजर ख़ुशहाल बशर इंसाफ़ अगर ना पाएगा Comments

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शादाब शजर ख़ुशहाल बशर इंसाफ़ अगर ना पाएगा
उस वीरान शहर में पंछी लौट के फिर क्यों आएगा
रहबर ही जब ज़हर है घोले अपने शहर की माटी पर
ऐसे शहर के मज़लूमों को अदल कहाँ मिल पाएगा
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NADIR HASNAIN
COMMENTS
M Asim Nehal 14 November 2015

DIl ko choo jaane wali nazm hai....Bahut khoob....

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