Hasmukh Amathalal

Gold Star - 382,207 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

जीवन सफल हो जाए - Poem by Hasmukh Amathalal

जीवन सफल हो जाए

हो सके तो किसी का राहगीर बन लेना
एसा नसीब कहाँ है आलमगीर का होना
चल पड़े है किश्ती लेकर, अनजान राहों पर
कब तक भरोसा रखे, अंजान बाहों पर

प्यार कर ना नसीब में सबको नहीं होता
जिसको नसीब होता है, वो बभाा नहीं पाता
हम ने चाहा ऐसा नसीब हमें भी मिल जाएँ
पर होता नहीं ऐसा, सब के नसीब खुल जाएँ

गले से मिल ना हमें अच्छा लगता है
जी को सुकून ओर मन को खूब भाता है
रब हमें भले ही ना दे, कोई दौलत या खजा ना
पर मिल जाए कोने में, दिल को ek ठिकाना

कोई समझे हमें या ना समझे
हम तो यहां आकर बुरे फंसे
प्यार मिल ना तो दूर रहा
सिर्फ मिली हमें दिल से निकली दुआ।

अपना ही समझो सब को
पसीना और भी बहा दो
फिर भी चलना यदि कठिन हो जाए
नतमस्तक दुआ मांगना, जीवन सफल हो जाए

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Poem Submitted: Sunday, January 17, 2016



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