Hasmukh Amathalal

Gold Star - 385,133 Points (17/05/1947 / Vadali, Dist: - sabarkantha, Gujarat, India)

आएगी जान में जान - Poem by Hasmukh Amathalal

आएगी जान में जान

माल सामने ही पड़ा था
कोई उसे छोड़कर चला गया था
मन मेरा मचला उसे उठाने के लिए
पर मना न सका इस काम के लिए।

किसी के शादी का जोड़ा था
साथ में सोने का अछोड़ा था
बहुत सारी नकदी थी
और साथ में एक चिठी भी थी

'बहन तेरे लिये भेज रहा हूँ'
और कुछ ज्यादा करने के लिये पसीना बहा रहा हूँ
तेरे को बाद मे कुछ सुनना ना पडे
ससुराल में तेरे मान-सम्मान और बढे

इस चिठी को पढ़कर मुझे एहसास हुआ
दिल में ठेस लगी और महसूस हुआ
कैसे मन को मनाता होगा 'सब सामान को खोकर'
मन मेरा ग्लानि से भर गया यह सब सोच कर

कोई और इसे ले जाता
हो सकता है इसी पैसो से शराब पिता
या मौज मजे में उड़ा देता
एक बहन का सपना भाई कैसे पुरा कर के पाता

में हेरान था और परेशान
लगता नहीं था काम इतना आसान
बड़ी मुश्किल से ढूंढ पाया घर का टेलीफोन
अब मुझे लगा भाई को आएगी जान में जान

में हेरान था और परेशान
लगता नहीं था काम इतना आसान
बड़ी मुश्किल से ढूंढ पाया घर का टेलीफोन
अब मुझे मजा भाई को आएगी जान में जान

हेलो कौन बोल रहा है?
सामने से आवाज आई' एक दुखी भाई बोल रहा है
अपना सब कुछ गंवा के "आंसू बहां रहा है"
सुबह से हूँ गमगीन और मन को कोस रहा हूँ

मैंने धीरे से कहा' अब गमगीन ना हो'
आप की इज्जत सलामत त्रहो
आप का सामान मेरी हिफाजत में है
एक बहन के मेरे पास अमानत है

Topic(s) of this poem: poem


Comments about आएगी जान में जान by Hasmukh Amathalal

  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 8:52:00 PM)


    welcome balwindersingh
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 8:33:00 PM)


    welcome bhai ssatnam singh
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 8:28:00 AM)


    welcome paramjit singh grewal
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 6:19:00 AM)


    Rajani Champaneri likes this.
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    welcome
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 6:14:00 AM)


    welcome Jitu V. Kural likes this
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 6:09:00 AM)


    Manoj Prajapati likes this.
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    Manoj Prajapati
    Manoj Prajapati so nice....ap biti h shyed.
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 6:05:00 AM)


    welcome pramod tiwari
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 5:40:00 AM)


    welcome bhagwant singh taneja
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 5:19:00 AM)


    Sanpreet Chugh likes this.
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 5:17:00 AM)


    Sanpreet Chugh shared your photo.
    6 hrs ·
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 5:16:00 AM)


    Chhaya Sharma likes this.
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    welcome
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 5:06:00 AM)


    Gagan Dwivedi likes this.
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/21/2016 5:01:00 AM)


    Niranjan Singh likes this.
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    welcome
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  • Mehta Hasmukh Amathalal (1/20/2016 9:49:00 AM)


    आएगी जान में जान

    माल सामने ही पड़ा था
    कोई उसे छोड़कर चला गया था
    मन मेरा मचला उसे उठाने के लिए
    पर मना न सका इस काम के लिए।

    किसी के शादी का जोड़ा था
    साथ में सोने का अछोड़ा था
    बहुत सारी नकदी थी
    और साथ में एक चिठी भी थी

    बहन तेरे लिये भेज रहा हूँ
    और कुछ ज्यादा करने के लिये पसीना बहा रहा हूँ
    तेरे को बाद मे कुछ सुनना ना पडे
    ससुराल में तेरे मान-सम्मान और बढे

    इस चिठी को पढ़कर मुझे एहसास हुआ
    दिल में ठेस लगी और महसूस हुआ
    कैसे मन को मनाता होगा सब सामान को खोकर
    मन मेरा ग्लानि से भर गया यह सब सोच कर

    कोई और इसे ले जाता
    हो सकता है इसी पैसो से शराब पिता
    या मौज मजे में उड़ा देता
    एक बहन का सपना भाई कैसे पुरा कर के पाता

    में हेरान था और परेशान

    सामने से आवाज आई एक दुखी भाई बोल रहा है
    अपना सब कुछ गंवा के “आंसू बहां रहा है”
    सुबह से हूँ गमगीन और मन को कोस रहा हूँ

    मैंने धीरे से कहा अब गमगीन ना हो
    आप की इज्जत सलामत त्रहो
    आप का सामान मेरी हिफाजत में है
    एक बहन के मेरे पास अमानत है
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Poem Submitted: Wednesday, January 20, 2016



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