Shashikant Nishant Sharma

Rookie - 133 Points (03 September,1988 / Sonepur, Saran, Bihar, India)

कम बोलिए ज्यादा समझिये - Poem by Shashikant Nishant Sharma

मैं नहीं जनता राजनीती
पर एक बात कहूँ निति की
रखिये याद हरदम
बोलिए बहुत कम
यह बात है उत्तम
निति है सर्वोतम
क्योंकि कम बोलने से
चुपचाप रहने से
बात से विवाद नहीं होता
विवाद से झगड़ा- फसाद नहीं होता
कोई बोलता है ज्यादा बोलने से
आदमी बन जाता है उत्तम
टी हम कहते है कम बोलने से
आदमी बन जाता है सर्वोत्तम
कम बोलने का मतलब
हमेशा बंद नहीं रखिये लब
बोलिए वही बात जो जरुरी हो
बात जो प्यारी हो
कम बोलने से आदमी बनता गंभीर
और वही होता सच्चा अमीर
क्योंकि वही हो सकता है धीर
कलयुग में धीर ही होंगे वीर
जीत उन्ही की होगी
जिनके साथ शांति और उन्नति होगी
और शांति मिलेगी कब
कम बोलेंगे आप जब
कम बोलेन के फायदें अनेक
अनेक फायदों में फायदा एक
कम बोलेंगे जब आप
या चुप रहेंगे आप
सब समझेंगें आपकों विद्वान्
समझेंगे आपके पास है ज्ञान
आप है गंभीर
सब रहेंगे आपसे दूर
भले ही आप बेवकूफ
या उल्लू चपत तक
चुप रहिये न कहिये उफ़
सब समझेंगे आपको चालक
ऐसी बात नहीं है
कौन कहता ये सही है?
कि कम बोलने वाले बेवकूफ होते है
कम बातें बोने वाला ही चलाक हो
अच्छी बातें पहले बोलिए
अपने अनुभव का मिशल दीजिये
गलत बात न बोलिए
पहले जरा सोचिये
क्या इससे आपका हित होने वाला है?
इससे सुनने वाले का क्या हनी होने वाला है?
आपका लाभ महत्वपूर्ण है
या दुसमन का हानी सम्पूर्ण है
खाइये विचार का चूर्ण
बोलिए विचारपूर्ण
कम से कम बोलिए
ज्यादा से ज्यादा समझिये
बात को बात की तरह कीजिये
बात का न बतंगर बनाया कीजिये
बस इतना कीजिये
बात ऐसा न बोलिए
कि किसी का दिल टूट जाये
किसी की जिंदगी लुट जाये
बात में मिठास हो
प्यार की तलाश हो
जिन्दगी का न हास हो
न किसी का मन उदास हो
बस एक आस हो
बात दिल को पास लाये
जीवन सुखमय हो जाये
...
शशिकांत निशांत शर्मा 'साहिल'


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Poem Submitted: Tuesday, January 29, 2013



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